चित्रकूट जेल में दुर्दांत मुकीम काला, मेराजुद्दीन को अंशुल दीक्षित ने मारा, पुलिस मुठभेड़ में अंशुल भी मार गिराया
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। यूपी के चित्रकूट जेल के अंदर कैदियों के बीच हुये गैंगवार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय मुकीम कला व बाँदा जेल में बंद माफिया विधायक मुख्तार अंसारी का गुर्गा मेराजुद्दीन मारे गये। हालांकि इन दोनों को मारने का आरोपी अंशुल दीक्षित भी पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया। इस घटना के बाद बाँदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के बैरग की कड़ी किले बंदी कर दी गयी है। राज्य मुख्यालय पर अपरपुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि शुक्रवार की दाेपहर में बाँदा जेल में गोलियां चलीं।

इसमें सहारनपुर जेल से कुछ दिन पहले ही चित्रकूट लाया गया मुकीम काला और बनारस जेल से लाया गया मुख्तार अंसारी का खास मेराजुद्दीन मारे गए।जेल अधिकारियों ने बताया कि इन्हें सीतापुर के शार्प शूटर अंशुल दीक्षित ने मारा है। बाद में पुलिस ने मुठभेड़ में अंशुल उर्फ अंशू को भी मार गिराया। जेल में वेस्ट यूपी के टॉप मोस्ट क्रिमिनल मेराजुद्दीन और मुकीम उर्फ काला पर सीतापुर के शार्प शूटर अंशुल उर्फ अंशू दिक्षित ने गोलियां चलाई हैं। अंशू सीतापुर का शार्प शूटर है। दोनों गुटों में हुए संघर्ष में मेराजुद्दीन और मुकीम मारे गए। अंशू भी जेल परिसर में ही पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है।
शातिर अपराधी अंशुल कई महीने से जेल में बंद है। पश्चिमी यूपी के गैंगस्टर मुकीम काला और पूर्वांचल के मुख्तार गैंग का गुर्गे मिराजुद्दीन को भी काफी दिनों पहले चित्रकूट जेल में लाया गया था। शुक्रवार सुबह अंशुल ने मौका पाकर पिस्टल से दोनों बदमाशों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। जब तक सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते तब तक अंशुल दीक्षित ने दोनों के भीतर कई राउंड गोलियां उतार दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने अंशुल को ललकारा और आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन उसने सुरक्षा कर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में वह पुलिस की गोली से मारा गया। खबर मिलते ही आईजी, कमिश्नर, डीएम, एसपी समेत सारे आला अफसर जेल पहुंच गए। घंटेभर के अंदर जेल के अंदर कई थानों का फोर्स भी मोर्चा लेने पहुंच गई।
अंशुल ने मुकीम, मेराजुद्दीन के अलावा तीन अन्य कैदियों पर भी हमला किया था। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का मूल निवासी अंशुल उर्फ अंशू दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र के रूप दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया। वर्ष 2008 में वह गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था। अंशुल को 2019 में दिसंबर में सुल्तानपुर जेल में वीडियो वायरल होने के बाद चित्रकूट जेल भेजा गया था।
लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेक्रेट्ररी विनोद त्रिपाठी और गौरव सिंह की हत्या का आरोपित है अंशु दीक्षित
27 अक्टूबर 2013 को अंशु दीक्षित ने भोपाल में एमपी पुलिस और यूपी एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी थी। इस गोलीबारी में एसटीएफ के दरोगा संदीप मिश्र और भोपाल क्राइम ब्रांच का सिपाही राघवेंद्र पांडेय घायल हो गए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने अंशु की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पांच दिसंबर 2014 को एसटीएफ को सूचना मिली कि अंशु गोरखपुर में मौजूद है और वहां से नेपाल भागने की फिराक में है। इसके बाद एसटीएफ की टीम ने सर्विलांस की मदद से उसकी घेराबंदी की। गोरखनाथ इलाके में थोड़ी देर मुठभेड़ चली और उसी दौरान अंशु को गिरफ्तार कर लिया गया। अंशु के पास से 9 एमएम की पिस्टल और अन्य सामान मिले थे। सीतापुर निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ के सीएमओ हत्याकांड में भी आरोपी रह चुका है। वह जीआरपी की कस्टडी से वर्ष 2013 में उस समय भाग गया था। जब उसे पेशी पर ले जाया जा रहा था।
कौन है मुकीम काला
मुकीम काला ने पहली वारदात हरियाणा के पानीपत में एक मकान में डकैती के रूप में अंजाम दी। इस मामले में मुकीम काला जेल गया था। उसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपने कदम आगे बढ़ा दिए। मुकीम काला का खौफ वेस्ट यूपी के अलावा हरियाणा के पानीपत और उत्तराखंड के देहरादून में भी फैला है। मुकीम का गैंग पुलिस के रडार पर तब आया जब इन्होंने पुलिस पर भी हमले करने शुरू कर दिए। पुलिस के अनुसार, दिसबंर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मुस्तफा उर्फ कग्गा मारा गया जिसके बाद मुस्तकीम काला ने कग्गा के गैंग की बागडोर संभाल कर वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। मुकीम पर 61 मुकदमें दर्ज हैं।