bauddh teerth takshashila (paakistaan) : mandiron, mathon aur stoopon se sushobhit vaibhavapoorn nagar tha तक्षशिला (पाकिस्तान): ससार के पुरातन सांस्कृतिक केंद्रों में से एक तथा प्राचीन विश्वविद्यालय और कलात्मक निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थल रहा है – तक्षशिला। पौराणिक ग्रंथों में प्राप्त संदर्भ के अनुसार, तक्षक अर्थात् नागदेव के नाम पर तक्षशिला को संबोधन मिला। दो हजार साल से भी पहले यह अनेक मंदिरों, मठों और स्तूपों से सुशोभित वैभवपूर्ण नगर था, जो बाद में प्राकृतिक आपदाओं तथा आक्रमणकारियों की वजह से खंडहर के रूप में बदल गया। पाकिस्तान में जी.टी. रोड के पास तक्षशिला के खंडहर करीब पचास किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में फैले हैं।
प्राचीन कुषाण काल में निर्मित हिंदू – मंदिर तो पहले ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुके थे, बाद में विश्वविद्यालय को भी आक्रमणकारियों ( ग्रीक, ईरानी और मंगोल ) ने तोड़ डाला था। शेष बचे हुए भवनों और मूर्तियों में गौतमबुद्ध, बोधिसत्व की प्रतिमाएं तथा कई विशाल इनमें प्रमुख धर्मराजिका स्तूप है, जिसके चतुर्दिक अनेक छोटे – छोटे स्तूप और परिक्रमा – पथ हैं। यहीं से बाई ओर बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में विशाल मूर्ति है, जिसके दर्शन के लिए बौद्धों और हिंदुओं के अलावा मुसलमान भी पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि प्रतिमा की नाभि में अंगुली डालकर पूजा करने से असाध्य रोग दूर होते हैं। इसके अलावा श्रीक्षयस्तूप, सूर्यमंदिर, कुणालसंघाराम, श्रीसुख स्तूप हैं। और कलवन क्षेत्र के अवशेष दूर – दूर तक फैले हैं। यहां पहुंचने के लिए लाहौर से रावलपिंडी तक जी.टी. रोड का सुगम मार्ग है। रेल और विमान की सुविधा भी रावलपिंडी तक है।