बुधवार व्रत कथा – उत्तम सन्तान प्राप्त्ति के लिए किया जाता है बुधवार का व्रत

2
1181

बुधवार का व्रत उत्तम सन्तान प्रदान करता है। व्रत में सफेद फूल व हरे रंग की वस्तु चढ़ाई जाती है, स्त्रियां प्रात: स्नान के बाद बुद्धा देवी का पूजन करती हैं। पूजा साधारण ढंग से की जाती है पर किसी भी स्त्री ने यदि कोई मान्यता की हो तो पूजन की विशेष विधि होती है, सोने-चांदी पीपल या मिट्टी के कलश में जल भरकर रख जाता हैं, धूमधाम से बधाई चढ़ाई जाती है। एक पिटारी में सफेद कपड़े, गहने भसदूर, चूड़ी बिछुये रख लिए जाते हैं। पूजन के बाद कथा सुनकर दिन में एक बार भोजन करने का विधान है।

व्रत कथा-

एक व्यापारी दूर देशों में व्यापार के लिए गया था। उसके विदेश में जाने के कुछ दिन बाद बुधवार को उसकी पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया, कई वर्षों बाद जब वह लौटा तो घर में धन संपत्ति और सामान से लदी उसकी गाड़ी दलदल में फंस गई। काफी प्रयत्नों के बाद भी वह गाड़ी खींचने में सफल न हुआ तो पंडितों ने बताया कि बुधवार को पैदा हुआ बच्चा यदि गाड़ी को हाथ लगा देगा तो गाड़ी दलदल से बाहर निकल जाएगी। बुधवार के जन्मे बालक की खोज में वह अपने गांव पहुंचा। दरवाजे-दरजावे पहुंचकर इस बारे में पूछने लगा।

Advertisment

अपने घर पहुंचने पर उसने पाया कि उसका अपना पुत्र ही बुधवार को पैदा हुआ है। वह पुत्र को लेकर गाड़ी के पास पहुंचा। पुत्र ने गाड़ी को जैसे ही हाथ लगाया ही था तो वह गाड़ी दलदल से बाहर आ गई। गाड़ी लेकर वह घर पहुंचा और सब सुख के से रहने लगे लगे। वह लड़का भी बड़ा ही होनहार व बुद्धिमान निकला तभी से सभी स्त्रियां उसी प्रकार से पुत्र प्राप्त करने के लिए बुद्धा देवी का व्रत करती हैं।

– सनातनजन डेस्क

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here