kaindee (shreelanka): anuraadhaapur ke baad shreelanka mein doosara teerth kaindee कैंडी (श्रीलंका): अनुराधापुर के बाद श्रीलंका में दूसरा महत्त्वपूर्ण तीर्थनगर कैंडी है, जिसे सिंहल सम्राट् विमलधर्मसूर्य प्रथम ने पंद्रहवीं सदी में अपनी राजधानी के रूप में बसाया था। उल्लेखनीय है कि भारत के सम्राट अशोक ने भगवान् बुद्ध की अस्थि तथा दांत अपने राजकुमार के द्वारा श्रीलंका में भेजे थे। इस महान् धरोहर को श्रीलंका के राजा अपने राजमहल के पूजाघर में रखा करते थे। विमल धर्मसूर्य प्रथम ने बुद्ध के दांत को महल से निकाल कर भक्तों के दर्शन के लिए बाहर एक भव्य मंदिर बनाकर सुरक्षित रखवा दिया। यह महत्त्वपूर्ण मंदिर, जिसे डालदा मलिगावा ( भगवान के दांत ) कहते हैं, कैंडी में स्थित है।
पंद्रहवीं सदी में निर्मित इस मंदिर का कई बार विस्तार और विकास किया गया है। सुंदर प्राचीर और काष्ठकला तथा चित्रकारी से युक्त यह मंदिर दर्शनीय है। दो मंजिले मंदिर के मध्य भाग में कलापूर्ण स्तंभों की श्रृंखला से घिरे आंगन में रत्नजड़ित स्वर्णपात्र में ‘ देवता के दांत ‘ रखे हैं प्रत्येक सुबह और संध्या के समय संगीत वाद्य के साथ इस देवालय में आरती की जाती है। इस मुख्य मंदिर के निकट ही एक और प्राचीन मंदिर है, जिसे नाथदेवालय कहते हैं। इस हिंदू मंदिर में अवलोकितेश्वर नाथ की पुरानी प्रतिमा है, जिसकी पूजा बौद्ध और हिंदू दोनों श्रद्धापूर्वक करते हैं। कैंडी पहाड़ियों से घिरा एक सुंदर शहर है। श्रीलंका के मध्य भाग में स्थित कैंडी पहुंचने के लिए रेल मार्ग या सड़क से यात्रा की जा सकती है। यह राजधानी कोलंबो से करीब 125 किलोमीटर उत्तर – पूरब की ओर है। यहां ठहरने और भोजन की अच्छी सुविधाएं हैं।