लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के प्रस्ताव का देवबंद के मौलाना ने किया विरोध
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार के अब इस फैसले पर बवाल शुरू हो गया है। तमाम राजनेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं। इस बिल के विरोध में कई मुस्लिम नेताओं से लेकर मुस्लिम धार्मिक गुरुओं ने कैबिनेट के नए प्रस्ताव के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। दवबंदी उलमा मुफ्ती असद कासमी ने कहा, 18 साल की उम्र में लड़की बालिग हो जाती हैं। इस्लाम ये कहता है की 18 साल की उम्र बिल्कुल सही थी, उनकी ख्वाहिश भी होती है। अगर वह गुनाह करते हैं तो उनका गुनाह मां बाप पर भी शेयर होता है। इसलिए 18 साल की उम्र बिल्कुल सही थी लेकिन सरकार जो कर रही है वह किसी के कहने से नहीं रुकने वाली है।
उन्होंने कहा कि “जैसा कि आप ने सवाल किया है तो इस सिलसिले में इस्लाम क्या कहता है, मैं आपको बता दिया। मैं ना तो में कोई फतवा दे रहा हूं यह मेरी अपनी निजी राय हैं और इस्लाम इसके बारे में क्या कह रहा है मैं वह बता देता हूं।शरीयत इस्लाम के अंदर ये कहता है जब लड़का और लड़की बालिग हो जाए तो मां-बाप की अगर हैसियत उनकी शादी करने के लिए है तो उनकी तुरंत शादी कर देनी चाहिए। इसकी वजह भी बताई है क्योंकि जब लड़का और लड़की बालिग हो जाते है, उनकी ख्वाहिश भी होती है। समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद शफीकुर्रहमान बर्क, देवबंदी उलमा मुफ्ती असद कासमी, सपा नेता अबु आजमी,अनेक मुस्लिम विधायक कों ने मोदी कैबिनेट द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर आपत्ति जताई है।
संभल से सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि लड़कियों के लिए 18 साल की उम्र काफी थी। 21 साल की उम्र करना ठीक नहीं है। वे ससुराल जाकर भी पढ़ सकती थीं। बर्क बोले- ‘मुल्क का माहौल ख़राब है, उससे बच जाएंगी, आप देख रहे हैं कि हालात कितने खराब हैं? हमको अपनी बेटियों का ख्याल रखना पड़ता है। कहीं उनके साथ गलत हरकत ना हो जाए। मैं इस बिल का संसद विरोध करूंगा। देश के अंदर गरीब यही चाहता है कि हमारी बेटी की जल्दी शादी हो जाए और वो अपने घर चले जाये।