सिख धर्म में निर्गुण ईश्वर की प्रार्थना

0
2428

ईश्वर अनादि है, उसका न कोई अंत है और न ही आरंभ है। वह निर्गुण है, निराकार है। उस अजन्मा ईश्वर की प्रार्थना सिख धर्म में भी कुछ इस प्रकार की जाती है।

एक औं सतनाम कर्तापुरुष निर्भउ निर्बैर

Advertisment

अकाल मूरत अजूनी सैभं गुरुप्रसाद जप ।

आदि सच , जुगादि सच , है भी सच,

नानक होसी भी सच । वाहे गुरु ॥

भावार्थ- परमात्मा एक है। उसका नाम सत्य है, अर्थात् वह सदा स्थिर और एकरस है। सृष्टिका कर्ता है, निर्भय और निर्वैर है । उसका स्वरूप काल से परे है , वह समय के चक्रमें कभी नहीं आता। मृत्यु, रोग और बुढ़ापा उसके लिये नहीं है। वह अजन्मा है, स्वयम्भू है , पथ – प्रदर्शक है और कृपा की मूर्ति है । हे मनुष्य! तू उसे जप।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here