वेद स्वाध्याय; सामवेद मंत्र 992 में इन्द्र और अग्नि के नाम से आत्मा और मन तथा राजा एवं सेनापति का आह्वान किया गया है। मंत्र निम्न है।।
या वां सन्ति पुरुस्पृहो नियुतो दाशुषे नरा।
इन्द्राग्नी ताभिरा गतम्।।
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मंत्र का पदार्थ सामवेद भाष्यकार वेदमूर्ति आचार्य (डॉ०) रामनाथ वेदालंकार जी रचित:- हे नेता आत्मा और मन वा राजा एवं सेनापति! त्यागशील परोपकारी जन के लिए जो तुम्हारी लाख संख्या वाली बहुत महत्वाकांक्षा वाली उदात्त कामनाएं हैं उनके साथ, तुम आओ।
भावार्थ:- शरीर में मनुष्य का अन्तरात्मा और मन तथा राष्ट्र में राजा और सेनाध्यक्ष दूसरों का हित करने वाले मनुष्य का ही उपकार करते हैं, स्वार्थ की कीचड़ में लिप्त मनुष्य का नहीं।
-प्रस्तुतकर्ता मनमोहन आर्य
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